90 के दशक में दूरदर्शन का दौर टेलीविजन की दुनिया के लिए गोल्डन पीरियड माना जाता है। उस दौर में कई धारावाहिक आए और गए, लेकिन साल 1997 में शुरू हुए बच्चों के पसंदीदा सुपरहीरो शो 'शक्तिमान' ने जो लोकप्रियता हासिल की, उसकी मिसाल आज भी दी जाती है। इस शो के हर एक किरदार ने दर्शकों के दिलों पर अपनी गहरी छाप छोड़ी। चाहे वह मुकेश खन्ना का गंगाधर और शक्तिमान का डबल रोल हो या फिर सुरेन्द्र पाल द्वारा निभाया गया खूंखार विलेन 'तमराज किल्विश' का किरदार। इसी शो में एक ऐसा भी रहस्यमयी और डरावना किरदार था, जो हमेशा एक काली बिल्ली के गेटअप में नजर आता था। किल्विश की इस वफादार दूत को दर्शक 'शलाका' के नाम से जानते थे। शो में लगातार शक्तिमान की राह में रोड़े अटकाने वाली इस काली बिल्ली का असली चेहरा उस वक्त दर्शकों को कभी देखने को नहीं मिला, लेकिन इस नकाब के पीछे छिपी अदाकारा आज बॉलीवुड और टेलीविजन जगत की एक बेहद दिग्गज और सम्मानित हसीना बन चुकी हैं।
छोटे पर्दे से लेकर फिल्मों तक का शानदार सफर
नकाब के पीछे से अपने करियर की एक मजबूत शुरुआत करने वाली इस बेहतरीन अभिनेत्री ने 'शक्तिमान' के बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। हम जिसकी बात कर रहे हैं ये कोई और नहीं बल्कि अश्विनी कालसेकर हैं। उन्होंने मशहूर खोजी सीरियल 'सीआईडी' में इंस्पेक्टर आशा के दमदार और गंभीर किरदार से घर-घर में अपनी एक नई पहचान बनाई। इसके बाद साल 2006 में एकता कपूर के सुपरहिट डेली सोप 'कसम से' में मुख्य विलेन 'जिज्ञासा वालिया' के रूप में उनकी एक्टिंग को आज भी याद किया जाता है। छोटे पर्दे पर अपनी अदाकारी का लोहा मनवाने के बाद उन्होंने बड़े पर्दे का रुख किया और वहां भी अपनी अमिट छाप छोड़ी। रोहित शेट्टी की सुपरहिट 'गोलमाल' सीरीज में उनकी जबरदस्त कॉमिक टाइमिंग ने दर्शकों को लोटपोट कर दिया। गंभीर किरदारों से लेकर कॉमेडी तक, उन्होंने हर विधा में खुद को साबित किया है। 'अंधाधुन', 'मेरी क्रिसमस', 'सिंघम', 'ऑल द बेस्ट', 'बब्ली बाउंसर' और 'लक्ष्मी' जैसी कई बड़ी हिंदी और मराठी फिल्मों में उनके अभिनय को खूब सराहा गया है। 28 साल पहले करियर की शुरुआत करने वाली यह खूबसूरत अदाकारा आज 57 साल की उम्र में भी उतनी ही सक्रिय और ग्रेसफुल नजर आती हैं।
पहले हमसफर से जुदा हुईं राहें
अश्विनी कालसेकर का पेशेवर जीवन जितना शानदार और सफल रहा, उनका निजी जीवन उतने ही उतार-चढ़ाव से भरा रहा। उन्होंने अपने जीवन में दो शादियां कीं। उनकी पहली शादी मशहूर टेलीविजन और फिल्म अभिनेता नीतेश पांडे के साथ हुई थी। दोनों ने बेहद अरमानों के साथ अपने इस नए रिश्ते की शुरुआत की थी, लेकिन वक्त के साथ उनके बीच आपसी मतभेद बढ़ने लगे। तमाम कोशिशों के बावजूद दोनों के बीच की दूरियां कम नहीं हो सकीं और शादी के महज चार साल बाद ही यह रिश्ता हमेशा के लिए टूट गया। आपसी सहमति से दोनों एक-दूसरे से अलग हो गए और अपनी-अपनी जिंदगी की नई राहों पर आगे बढ़ गए। बता दें, नीतेश अब इस दुनिया में नहीं हैं।
दूसरी शादी और मां न बन पाने का दर्द
पहले रिश्ते के कड़वे अनुभवों से उबरने के बाद अश्विनी की जिंदगी में प्यार ने दोबारा दस्तक दी। उन्होंने भारतीय और साउथ सिनेमा के जाने-माने खूंखार खलनायक और बेहतरीन सह-कलाकार मुरली शर्मा से दूसरी शादी की। दोनों की आपसी समझ और बॉन्डिंग बेहद खूबसूरत रही है और वे एक-दूसरे के साथ एक बेहद खुशहाल जिंदगी बिता रहे हैं। हालांकि इस खुशहाल शादीशुदा जिंदगी के बीच दोनों को कभी संतान का सुख नहीं मिल सका। दरअसल अश्विनी को किडनी की एक बेहद गंभीर बीमारी थी, जिसके चलते डॉक्टरों ने उन्हें साफ तौर पर मां न बनने की सख्त हिदायत दी थी। डॉक्टरों का कहना था कि उनका कमजोर शरीर गर्भावस्था के भारी तनाव को नहीं झेल पाएगा और ऐसा करने पर उनकी या होने वाले बच्चे की जान को गंभीर खतरा हो सकता था। उस दौर में आज की तरह सरोगेसी जैसी आधुनिक तकनीकें भी इतनी आम नहीं थीं और उनके पास आर्थिक संसाधन भी सीमित थे। दोनों ने माता-पिता बनने की काफी कोशिशें कीं, लेकिन स्वास्थ्य से जुड़ी इन बड़ी बाधाओं के कारण उनका यह सपना अधूरा रह गया। इसके बावजूद दोनों कलाकारों ने एक-दूसरे का संबल बनकर जीवन के इस अधूरेपन को कभी अपने रिश्ते पर हावी नहीं होने दिया।
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